इंसानों का दबाव नहीं सह पा रही पृथ्वी-नई रिसर्च की चेतावनी
दो शताब्दियों की जनसंख्या पर आधारित है Environmental Research Letters की रिपोर्ट

पृथ्वी पर बढ़ती आबादी और संसाधनों के तेज इस्तेमाल ने पर्यावरण पर गंभीर दबाव डाल दिया है।एक नई रिसर्च के अनुसार, 8.3 अरब की जनसंख्या प्राकृतिक संसाधनों पर अत्यधिक दबाव डाल रही है, जिससे पृथ्वी की वहन क्षमता कमजोर पड़ रही है. वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी की आदर्श वहन क्षमता केवल 2.5 अरब हैं और मौजूदा जीवन-शैली को बनाए रखने के लिए इंसानो को लगभग 1.7 पृथ्वी जितने संसाधनों की जरूरत पड़ेगी।
पर्यावरण विज्ञान की प्रतिष्ठित जर्नल Environmental Research Letters में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की “सस्टेनेबल कैरिंग कैपेसिटी” यानी ग्रह की वह सीमा बताई है, जहाँ तक पृथ्वी मानव आबादी और संसाधनों की मांग के बीच संतुलन को संभाल सकती है। आस्ट्रेलिया के फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक कोरी ब्रेडशॉ के नेतृत्व में हुई रिसर्च के मुताबिक औद्योगिकीकरण, तेजी से बढ़ती जनसंख्या और ऊर्जा की बढ़ती मांग ने प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव डाल दिया है। इंसान जंगलों, पानी, खनिज और जीवाश्म ईंधन का उपयोग पृथ्वी की पुनर्निर्माण क्षमता से कहीं ज्यादा तेजी से कर रहा है।
रिसर्च में यह भी बताया गया कि 1950 के बाद दुनिया में संसाधनों की खपत और आबादी दोनों तेजी से बढ़े हैं। वर्तमान में वैश्विक आबादी 8 अरब से ज्यादा हो चुकी है, जिससे पृथ्वी के पर्यावरणीय तंत्र पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
वैज्ञानिकों के अनुसार यदि संसाधनों का यही उपयोग जारी रहा तो इसके कई गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। इनमें जलवायु परिवर्तन की गति तेज होना, जंगलों का तेजी से खत्म होना, जैव विविधता में गिरावट और पानी व खाद्य संसाधनों की कमी शामिल हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पृथ्वी की सीमाओं को समझना और संसाधनों का टिकाऊ उपयोग करना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि दुनिया ने समय रहते पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा के स्वच्छ विकल्पों और संसाधनों के संतुलित उपयोग की दिशा में कदम नहीं उठाए, तो आने वाले वर्षों में पृथ्वी पर रहने वाली मानव आबादी के लिए गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा हो सकता है। यह अध्ययन एक चेतावनी है कि पृथ्वी के सीमित संसाधनों को बचाने के लिए अभी ठोस कदम उठाना जरूरी है।