टेक इंडस्ट्री में छँटनी की सुनामी: 2025 का संकटऔर भविष्य की दिशा

2025 में ग्लोबल टेक सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। दुनिया भर की प्रमुख टेक कंपनियों—जैसे Intel, Amazon, Microsoft, Meta, Google और भारत की TCS व Infosys—द्वारा की गई बड़े पैमाने पर छँटनी ने सिर्फ़ नौकरियों को ही प्रभावित नहीं किया, बल्कि लाखों परिवारों की आर्थिक सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव छोड़ा है।रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष 1,00,000 से अधिक टेक पद सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं, और वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।
छँटनी के प्रमुख कारणों में AI और ऑटोमेशन का तेजी से बढ़ता प्रयोग, महामारी के दौरान अधिक भर्ती करना, आर्थिक सुस्ती और बदलती बाजार अपेक्षाएँ शामिल हैं। महामारी के समय डिजिटल मांग बढ़ने पर कंपनियों ने बड़ी संख्या में हायरिंग की थी, लेकिन अब मांग सामान्य स्तर पर लौट चुकी है, जिससे कई कंपनियों ने लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटाई है। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऐसे कार्य करने में सक्षम हो चुका है जिनके लिए पहले मानव संसाधन की आवश्यकता होती थी। इससे स्किल मिसमैच और रोजगार असुरक्षा बढ़ी है।
रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि छँटनी सिर्फ नौकरी खोने का मामला नहीं है; यह मनो वैज्ञानिक रूप से भी झटका देती है।कई कर्मचारी चिंता, तनाव, अवसाद और पहचान खोने की भावना का अनुभव कर रहे हैं। वहीं बचे हुए कर्मचारी भी नौकरी की असुरक्षा, कार्य-भार बढ़ने और प्रदर्शन दबाव का सामना कर रहे हैं।

भारत जैसे देशों में सामाजिक सुरक्षा और बेरोजगारी बीमा प्रणाली की कमी इस संकट को और गंभीर बनाती है।कर्मचारियों को सीमित सेवरेंस, स्वास्थ्य सुरक्षा की कमी और नई नौकरी ढूँढ़ने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि यह स्थिति चुनौती पूर्ण है, लेकिन समाधान भी मौजूद हैं।कंपनियों को चाहिए कि वे छँटनी को अंतिम विकल्प मानें और कर्मचारियों के री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग पर गंभीरता से निवेश करें।सरकार को ऐसी नीतियाँ लागू करनी चाहिए जो तकनी की बदलाव के दौर में लोगों को सुरक्षित संक्रमण (Transition) प्रदान कर सकें।साथ ही, कर्मचारियों को भी भविष्य के कौशल जैसे AI टूलिंग, क्लाउडकंप्यूटिंग, डेटासाइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में खुद को विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।
यह स्पष्ट है कि तकनीक का संसार तेज़ी से बदल रहा है, औरआने वाले वर्षों में काम की प्रकृति और अधिक परिवर्तित होगी।इसलिए, यह आवश्यक है कि कंपनियाँ, सरकारें और कर्मचारी—तीनों—बदलते माहौल के लिए मिलकर तैयारी करें।यदि रणनीतियाँ सही समय पर अपनाई जाएँ, तो यह संकट एक अवसर में बदल सकता है, जहाँ मानव और तकनीक साथ मिल कर एक बेहतर, अधिकप्रभावी और स्थिर भविष्य की ओर बढ़ें।