Mohammad Ali Jinnah क्या आप जानते हैं झिनिया के जिन्ना होने की कहानी

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Mohammad Ali Jinnah

मोहम्मद अली जिन्ना के दादा हिन्दू थे

Mohammad Ali Jinnah जिन्ना के दादा एक धर्मपरायण हिन्दू प्रेमजी भाई मेघ जी ठक्कर थे। 19वीं शताब्दी के प्रारम्भ में प्रेमजी मछली पकडऩे के व्यवसाय में शामिल हो गए और फलस्वरूप उनकी घोर परम्परागत वैष्णव जाति ने उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया। इसके बाद उन्होंने मजबूरीवश इस्लाम धर्म धारण कर लिया। इससे वह अपनी जाति से और भी दूर हो गए। परिवार के कुछ लोगों ने उन्हें फिर से समझा-बुझा कर हिन्दू धर्म में लाने की कोशिश की लेकिन पोंगापंथी पुजारियों ने उनकी पेश नहीं चलने दी। आखिर प्रेमजी को बाहरी रूप में मुस्लिम होने की कवायद करनी पड़ी।

Mohammad Ali Jinnah नाम कैसे पड़ा

प्रेमजी भाई मेघ जी ठक्कर ने अपने बेटे का नाम झिनियाभाई रखा था क्योंकि उसका शरीर बिल्कुल हड्डियों के पिंजर जैसा था। यह पूरा कुनबा अपने सम्पूर्ण जीवन में केवल बाहरी दिखावे के रूप में ही मुस्लिम था।

मोहम्मद अली जिन्ना (Mohammad Ali Jinnah) को अपना कमजोर-सा शारीरिक ढांचा अपने पिता झिनिया से विरासत में मिला था। आज तक गुजरात में कमजोर और सूखे-सड़े शरीर वाले लोगों को झिनिया कहा जाता है।

शिया या सुन्नी मतों से दूरी

दिलचस्प बात यह है कि प्रेमजी भाई इस्लाम अपनाने के बावजूद मुख्यधारा के शिया या सुन्नी मतों में से किसी में भी शामिल नहीं हुए थे। इसकी बजाय उन्होंने इन दोनों समुदायों द्वारा काफिर माने जाते खोजा-इस्माइली पंथ में शामिल होना बेहतर समझा।

इसके दो कारण थे, पहला आगा खान के अनुयायी इन धनाढ्य लोगों ने उसकी काफी वित्तीय सहायता की थी और दूसरा वह अपने उन हिन्दू आलोचकों को सबक सिखाना चाहते थे जिन्होंने शुद्ध वैष्णव खान-पान पद्धति के उल्लंघन का आरोप लगाकर उन्हें सामाजिक रूप में बहिष्कृत किया था।

ठाकुरजी और तुलसी की पूजा

धर्मांतरण के बावजूद प्रेमजी भाई ने अपने कुल देवता श्रीनाथ जी के अलावा ठाकुर जी तथा तुलसी की पूजा-अर्चना जारी रखी। श्रीनाथ जी को भगवान कृष्ण का अवतार माना जाता है। हालांकि बाहरी रूप में वह मस्जिद में भी जाया करते थे।

खोजा इस्माइली समुदाय में प्रेमजी भाई का प्रवेश उनके दोस्त, मार्गदर्शक और धर्मोपदेशक आदमजी खोजा की बदौलत हुआ था और यही व्यक्ति उन्हें मछली व्यवसाय में और फिर आगा खान की संगत में लाया था।

प्रेमजी भाई के तीन बेटे थे-गंगजी, नत्थु एवं पूंजा (झिनिया), तीनों को ही अपनी जाति में से कोई रिश्ता नहीं मिल रहा था और इस कारण उन्होंने धर्मांतरित परिवारों में शादियां करवाईं। बाद में वे अपने परम्परावादी गांव को छोड़ कर अन्य जगहों पर जा बसे। झिनिया कराची में बस गया।

मामद भाई से Mohammad Ali Jinnah का सफर

जिन्ना के पिता का पूरा नाम झिनिया उर्फ पूंजाभाई प्रेमजी भाई ठक्कर था। नव धर्मांतरित परिवारों की परम्परा का पूरी तरह अनुपालन करते हुए वह भी अपनी धार्मिक पहचान को छिपाना चाहते थे इसलिए उन्होंने अपने ज्येष्ठ पुत्र का नाम मोहम्मद की बजाय ‘मामद’ रखा।

जिन्ना का पूरा नाम मामद भाई झिनिया भाई ठक्कर अथवा एम.जे. ठक्कर था, जब जिन्ना कराची की लारैंस रोड पर स्थित क्रिश्चियन मिशनरी सोसाइटी हाई स्कूल में पढ़ा करते थे तो उन्हीं दिनों उनके भावी प्रतिद्वंद्वी एम.के. गांधी भी राजकोट स्थित एक क्रिश्चियन शिक्षण संस्था एलफ्रैड हाई स्कूल के विद्यार्थी थे।

जनवरी 1893 में जब मामद इंगलैंड गए तो उन्होंनेे नए-नए नाम आजमा कर देखे। सर्वप्रथम तो उन्होंने ‘मामदभाई झिनियाभाई ऑफ कराची’ के रूप में अपनी पहचान बनाने का प्रयास किया और फिर ‘मोहम्मद जे. ठक्कर’ प्रयोग करना शुरू कर दिया जिसमें झिनिया की जगह ‘जीना’ प्रयुक्त किया गया था। लेकिन अंततोगत्वा उन्होंने ‘मोहम्मद अली जिन्ना’ या एम.ए. जिन्ना को स्थायी नाम के रूप में अपना लिया।

आलेख आर.के. मिश्रा साभार

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