Ved Pratap Vaidik Died: वैदिक की अविराम लेखनी को पूर्ण विराम

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ved pratap vaidik

Ved Pratap Vaidik Died वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक वेद प्रताप वैदिक का आज निधन हो गया वह 78 वर्ष के थे। बाथरूम में फिसल जाने के बाद वह चोटिल हो गए थे। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वेद प्रताप वैदिक पत्रकारिता जगत का जाना माना नाम थे। वह नवभारत टाइम्स व भाषा समाचार एजेंसी के लंबे समय तक संपादक रहे। इसके अलावा तमाम मीडिया हाउसों से जुड़े रहे। उन्हें अंतरराष्ट्रीय मामलों का जानकार माना जाता था।

वैदिक बहुत ही कम उम्र में पत्रकारिता में आ गए थे और मात्र 13 साल की उम्र में हिन्दी के लिए आंदोलन में भाग लिया था। इसके अलावा उन्होंने शैक्षिक स्तर पर हर परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। जीवन के अंतिम क्षणों पर उनकी लेखनी अविराम चलती रही।

Ved Pratap Vaidik का रोचक संस्मरण

वेद प्रताप वैदिक का एक रोचक संस्मरण यहां उल्लेखनीय है। वैदिक ने अन्तरराष्ट्रीय राजनीति पर अपना शोध ग्रन्थ हिन्दी में लिखा। लेकिन उस दौर में जेएनयू सिर्फ अंग्रेजी में लिखे शोध ग्रंथ ही स्वीकार करता था। इसलिए ‘स्कूल ऑफ इण्टरनेशनल स्टडीज़’ (जेएनयू) ने वैदिक की छात्रवृत्ति रोक दी और स्कूल से भी निकाल दिया। जेएनयू प्रशासन के इस कठोर कदम ने पूरे देश में तूफान खड़ा कर दिया। 1966-67 में इस मामले पर भारतीय संसद में जबर्दस्त हंगामा हुआ। डॉ॰ राममनोहर लोहिया, मधु लिमये, आचार्य जेबी कृपलानी, हीरेन मुखर्जी, प्रकाशवीर शास्त्री, अटल बिहारी वाजपेयी, चन्द्रशेखर, भागवत झा आजाद, हेम बरुआ आदि ने वैदिक का समर्थन किया। पूरे देश में हो रहे जबर्दस्त विरोध को देखते हुए इन्दिरा गान्धी की पहल पर ‘स्कूल’ के संविधान में संशोधन हुआ और वैदिक को वापस लिया गया। इसके बाद वे हिन्दी-संघर्ष के राष्ट्रीय प्रतीक बन गये।

Ved Pratap Vaidik Died को मिले सम्मान

वैदिक को इण्डियन कल्चरल सोसायटी द्वारा ‘लाला लाजपतराय सम्मान‘, 1992, मीडिया इण्डिया सम्मान, नई दिल्ली, 1992, प्रधानमन्त्री द्वारा रामधारी सिंह दिनकर शिखर सम्मान, 1992, हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा पत्रकारिता के लिये इक्कीस हजार रुपये की सम्मान राशि, 1990, डॉ॰ राममनोहर लोहिया सम्मान, कानपुर, 1990, मधुवन (भोपाल) द्वारा पत्रकारिता में ‘श्रेष्ठ कला आचार्य‘ की उपाधि, 1989, उत्तर प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा हिंदी सेवा के लिये ‘पुरुषोत्तम दास टण्डन‘ स्वर्ण पदक, 1988, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ‘अफगानिस्तान में सोवियत-अमरीकी प्रतिस्पर्धा‘ ग्रन्थ पर गोविन्द वल्लभ पन्त पुरस्कार, 1976 और काबुल विश्वविद्यालय द्वारा अफगानिस्तान सम्बन्धी शोधग्रन्थ पर दस हजार रुपये की सम्मान राशि, 1972 में प्रदान की गई।

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